नए क्रिकेट प्रशंसक की गाइड: क्रिकेट के नियम हिंदी में (2026)
क्रिकेट के नियम हिंदी में समझने का सबसे छोटा रास्ता यह है: हर टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं, एक ओवर में 6 वैध गेंदें फेंकी जाती हैं, और जीत उसी की होती है जो ज़्यादा रन बनाए। इन नियमों की आधिकारिक संहित...
नए क्रिकेट प्रशंसक की गाइड: क्रिकेट के नियम हिंदी में (2026)
क्रिकेट के नियम हिंदी में समझने का सबसे छोटा रास्ता यह है: हर टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं, एक ओवर में 6 वैध गेंदें फेंकी जाती हैं, और जीत उसी की होती है जो ज़्यादा रन बनाए। इन नियमों की आधिकारिक संहिता लंदन का मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) बनाए रखता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ICC खेलने की शर्तें तय करता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टी20 में 20 ओवर, वनडे में 50 ओवर और टेस्ट में पाँच दिन खेले जाते हैं। टी20 में गेंदबाज़ अधिकतम 4 ओवर और वनडे में 10 ओवर डाल सकता है, जबकि टी20 के पहले 6 ओवर पॉवरप्ले होते हैं। आउट होने के नौ तरीके हैं, जिनमें बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू और रन आउट सबसे आम हैं। सीमित ओवरों में नो-बॉल के बाद की गेंद फ्री हिट होती है। पहला काम: जिस फ़ॉर्मेट का मैच देख रहे हैं, उसके ओवर, पॉवरप्ले और डीआरएस के नियम पहले पढ़ लें, फिर स्कोरकार्ड खोलें।
MCC की संहिता की प्रस्तावना का हिंदी अनुवाद कुछ यूँ है: "क्रिकेट का आकर्षण और आनंद इस बात में है कि इसे न सिर्फ नियमों के अनुसार, बल्कि खेल भावना के दायरे में भी खेला जाए।" एक पुराने खिलाड़ी के तौर पर मैं इसमें इतना जोड़ूँगा कि नियम जाने बिना खेल भावना भी अधूरी रहती है। सुनिए, यही वह बात है जो मायने रखती है: जिसे नियम नहीं पता, वह हर विवादित फ़ैसले पर ठगा हुआ महसूस करता है। इस लेख का सवाल सीधा है: 2026 में एक आम भारतीय प्रशंसक को किन नियमों की जानकारी होनी चाहिए, ताकि मैच देखते समय या खेलते समय कोई फ़ैसला उसे चौंकाए नहीं? पिच रिपोर्ट की इस गाइड में हमने Wikipedia पर क्रिकेट के नियम वाला ढाँचा, स्थानीय टूर्नामेंटों के लिखित नियम और ताज़ा स्कोरकार्ड की भाषा, तीनों को जोड़कर तीन तरह के पाठकों के लिए अलग-अलग रास्ता बनाया है।
अगर आप क्रिकेट देखना अभी सीख रहे हैं, तो कहाँ से शुरू करें?
सबसे पहले चार चीज़ें सीखें: 11 खिलाड़ी, 6 गेंदों का ओवर, रन बनाने के तरीके (दौड़कर, चौका 4, छक्का 6) और आउट होने के तरीके। इतने से मैच का मोटा ढाँचा समझ आ जाता है। बाकी बारीकियाँ, जैसे वाइड, एलबीडब्ल्यू और पॉवरप्ले, देखते-देखते जुड़ती जाएँगी।
ध्यान देने की बात यह है कि शुरुआती दर्शक अक्सर स्कोरकार्ड की भाषा में अटक जाते हैं। "167/3" का मतलब है कि टीम ने 167 रन बनाए और 3 बल्लेबाज़ आउट हुए। हाल के एक भारत ए बनाम अफ़ग़ानिस्तान ए मैच के ESPN स्कोरकार्ड में प्रभसिमरन सिंह 84 रन पर विकेटकीपर के हाथों कैच आउट हुए और स्कोर 167/3 था। यह एक वाक्य आपको रन, विकेट और आउट होने का तरीका, तीनों सिखा देता है। गेंदबाज़ी करने वाली टीम का लक्ष्य बल्लेबाज़ों को आउट करना है और बल्लेबाज़ी करने वाली टीम का लक्ष्य रन जोड़ना। दूसरी पारी में पीछा करने वाली टीम को पहली टीम से एक रन ज़्यादा चाहिए, वरना बराबरी की स्थिति बनती है।
आउट होने के प्रमुख तरीके ये हैं:
- बोल्ड: गेंद सीधे स्टंप्स पर लगे।
- कैच: गेंद ज़मीन पर गिरने से पहले क्षेत्ररक्षक या विकेटकीपर के हाथ में आए।
- एलबीडब्ल्यू: गेंद पैड पर लगे और स्टंप्स की सीध में हो।
- रन आउट: रन लेते समय क्रीज़ पहुँचने से पहले स्टंप्स गिरा दिए जाएँ।
- स्टंप्ड: बल्लेबाज़ क्रीज़ से बाहर हो और विकेटकीपर स्टंप्स गिरा दे।
- हिट विकेट, टाइम्ड आउट, गेंद को दो बार मारना और क्षेत्ररक्षण में बाधा: ये दुर्लभ तरीके हैं।
एक बात जो ज़्यादातर गाइड नहीं बताते: अक्टूबर 2022 से "मांकडिंग" को अलग आउट नहीं, बल्कि रन आउट की श्रेणी में रखा गया है। यानी अब बहस नैतिकता की नहीं, नियम की है।
[Internal Link: क्रिकेट स्कोरकार्ड पढ़ना सीखें, शुरुआती गाइड]
अगर आप मोहल्ले या गली-टूर्नामेंट में खेलते हैं, तो कौन-से नियम अलग होते हैं?
स्थानीय टूर्नामेंटों में आयोजक अपने लिखित नियम बनाते हैं, जो MCC की संहिता से अलग हो सकते हैं। आम बदलाव हैं 16 ओवर का मैच (हर पारी 8 ओवर), 9 खिलाड़ियों की टीम, पहली-आख़िरी गेंद पर दोगुने रन और पीछे की नेट से टकराने पर तय रन। खेलने से पहले नियम-पत्र ज़रूर पढ़ें।
एक आयोजक के नियम-पत्र में यही सब दर्ज था: हर टीम में 9 खिलाड़ी, जिनमें से 8 खेलें और एक अतिरिक्त रहे। रिपोर्टिंग टाइम पर टीम न पहुँचे तो 10 मिनट की बफर अवधि के बाद विरोधी टीम को विजेता घोषित कर दिया जाए। अंपायर का फ़ैसला अंतिम हो और डीआरएस न हो। यही नियम-पत्र "मैजिक ओवर" भी बताता है, जिसमें बल्लेबाज़ी करने वाली टीम 3 से 5 ओवर के बीच किसी एक ओवर में पहले से लक्ष्य घोषित करती है, मसलन 12 रन। सुनिए, यही वह बात है जो मायने रखती है: ऐसे नियम सिर्फ़ उस टूर्नामेंट में चलते हैं, किसी किताब में नहीं मिलेंगे। मेरी सलाह है कि कप्तान मैच से पहले तीन सवाल पूछे: बाउंड्री कहाँ तक है, ऊपर की नेट से लगी गेंद पर कैच मान्य है या नहीं, और ओवरथ्रो के रन गिने जाएँगे या नहीं। इन तीनों जवाबों से 90 प्रतिशत झगड़े पहले ही टल जाते हैं। यह अनुभव का हिसाब है, किसी सर्वे का आँकड़ा नहीं।
स्थानीय मैच के लिए चेकलिस्ट:
- खिलाड़ियों की संख्या और अतिरिक्त खिलाड़ी (सब्स्टीट्यूट) की भूमिका
- कुल ओवर और हर गेंदबाज़ के अधिकतम ओवर
- नो-बॉल पर फ्री हिट है या नहीं, और फ्री हिट पर रन आउट मान्य है या नहीं
- चोट लगने पर रनर मिलेगा या नहीं
- विवाद की स्थिति में अंपायर का फ़ैसला अंतिम होगा या कोई अपील होगी
[Internal Link: गली क्रिकेट के लिए टूर्नामेंट नियम-पत्र का नमूना]
अगर आप IPL और टी20 के हर मोड़ पर नज़र रखते हैं, तो कौन-से नियम नतीजा बदल सकते हैं?
टी20 में नतीजा चार नियम बदल सकते हैं: पॉवरप्ले की फ़ील्ड पाबंदी, वाइड और नो-बॉल पर अतिरिक्त गेंद, फ्री हिट, और बारिश में डकवर्थ-लुईस-स्टर्न (DLS) की गणना। टाई होने पर सुपर ओवर निर्णय करता है। इन्हें जाने बिना मैच का रुख़ पढ़ना मुश्किल है।
पॉवरप्ले में पहले 6 ओवर तक सिर्फ़ दो क्षेत्ररक्षक 30 गज़ के घेरे के बाहर रह सकते हैं, इसलिए बल्लेबाज़ों को यहाँ सबसे ज़्यादा आज़ादी मिलती है। उसके बाद पाँच क्षेत्ररक्षक बाहर रखे जा सकते हैं। वाइड या नो-बॉल पर गेंद दोबारा फेंकी जाती है, इसलिए 20 ओवर का मैच असल में 120 से ज़्यादा गेंदों का हो सकता है। आधुनिक अंतरराष्ट्रीय मैचों में नो-बॉल की जाँच तीसरे अंपायर के पास रहती है, और अगर वह नो-बॉल घोषित हो जाए तो अगली गेंद फ्री हिट बनती है, जिस पर बल्लेबाज़ सिर्फ़ रन आउट हो सकता है। एक बारीक बात यह भी है कि पुरुषों के वनडे और टी20 अंतर्राष्ट्रीय में "स्टॉप क्लॉक" लागू है: अगला ओवर शुरू करने के लिए 60 सेकंड मिलते हैं, और बार-बार देरी पर 5 रन का जुर्माना लगता है। यह छोटा नियम आख़िरी ओवरों में रन-रेट का गणित बदल देता है। एलबीडब्ल्यू में डीआरएस "अंपायर्स कॉल" का मतलब है कि गेंद का आधे से कम हिस्सा स्टंप्स से टकरा रहा हो, तो मैदानी अंपायर का मूल फ़ैसला ही बना रहेगा।
इस वर्ग के पाठकों से एक विनम्र बात: यदि आप अनुमान, पूर्वानुमान या किसी भी तरह की शर्त के संदर्भ में इन नियमों को पढ़ रहे हैं, तो केवल उन्हीं प्लेटफ़ॉर्म पर जाएँ जो आपके क्षेत्र के क़ानून के अनुसार मान्य हों और 18 वर्ष से कम उम्र वालों के लिए नहीं हैं। किसी भी बाज़ार की शर्तों में यह लिखा होता है कि मैच रद्द, टाई या DLS से तय होने पर नतीजा कैसे गिना जाएगा। पुराने खिलाड़ी का अनुभव यही कहता है कि मुनाफ़े की शुरुआत उसी पन्ने को पढ़ने से होती है जिसे सब छोड़ देते हैं।
[Internal Link: आईपीएल पॉवरप्ले रणनीति और बल्लेबाज़ों के आँकड़े]
क्रिकेट के नियम समझने में लोग सबसे ज़्यादा कौन-सी गलतियाँ करते हैं?
सबसे आम गलतियाँ तीन हैं: हर फ़ॉर्मेट में एक जैसे नियम मान लेना, एलबीडब्ल्यू को सिर्फ़ "पैड पर लगी गेंद" समझना, और स्थानीय मैच में लिखित नियम न पूछना। इनसे बचने के लिए हर मैच से पहले फ़ॉर्मेट और नियम-पत्र की पुष्टि कर लें।
पहली गलती का उदाहरण: टेस्ट में फ्री हिट नहीं होती और ओवरों की कोई सीमा नहीं होती, जबकि टी20 में हर गेंदबाज़ के 4 ओवर तय हैं। दूसरी गलती एलबीडब्ल्यू की है। गेंद अगर लेग स्टंप के बाहर पिच हुई हो तो आमतौर पर आउट नहीं दिया जाता, और अगर बल्लेबाज़ ने शॉट खेलने की कोशिश की हो तो ऑफ़ स्टंप के बाहर लगी गेंद पर भी आउट हो सकता है। तीसरी गलती सबसे महँगी साबित होती है, क्योंकि तब बहस मैदान पर ही खत्म नहीं होती। एक कम चर्चित नियम यह भी है कि अगर गेंद विकेटकीपर के पीछे रखे हेलमेट से टकरा जाए तो बल्लेबाज़ी करने वाली टीम को 5 पेनल्टी रन मिलते हैं। नियमों की पूरी सूची के लिए MCC की आधिकारिक संहिता और ICC की खेलने की शर्तें सबसे भरोसेमंद स्रोत हैं।
इन गलतियों से बचने के लिए तीन छोटे कदम काफ़ी हैं:
- मैच शुरू होने से पहले फ़ॉर्मेट (टेस्ट, वनडे, टी20) की पुष्टि करें।
- विवादित फ़ैसले के बाद रीप्ले और अंपायर के संकेत को ध्यान से देखें, कमेंटेटर की राय पर नहीं।
- नियम-पत्र या आधिकारिक संहिता का वही हिस्सा खोलें जो फ़ैसले से जुड़ा हो।
[Internal Link: एलबीडब्ल्यू और डीआरएस आसान भाषा में]
30 दिन की जाँच: एक महीने में नियमों पर पकड़ कैसे बनाएँ?
पहले हफ़्ते में बुनियादी नियम, दूसरे में आउट होने के तरीके, तीसरे में फ़ॉर्मेट के अंतर और चौथे में अपडेट व स्थानीय नियम पढ़ें। रोज़ 10 मिनट और हर हफ़्ते एक मैच काफ़ी है। महीने के अंत में आप किसी भी स्कोरकार्ड को बिना रुके पढ़ पाएँगे।
सुझाव यह है कि हर हफ़्ते का एक लक्ष्य रखें। पहले हफ़्ते में एक पूरा टी20 मैच देखें और हर ओवर में रन और विकेट लिखें। दूसरे हफ़्ते में हर आउट पर खुद से पूछें कि यह किस तरीके से हुआ और अंपायर ने किस नियम का इस्तेमाल किया। तीसरे हफ़्ते में एक वनडे या टेस्ट का सत्र देखें और टी20 से अंतर गिनें, जैसे ओवर सीमा, फ़ील्ड पाबंदी और फ्री हिट। चौथे हफ़्ते में MCC की संहिता का एक अध्याय पढ़ें और अपने स्थानीय नियम-पत्र से मिलाएँ। यह सब करना पिच रिपोर्ट के पाठकों के लिए मुश्किल नहीं होना चाहिए, क्योंकि हम मैच समीक्षा, खिलाड़ी आँकड़े और बल्लेबाज़ी-गेंदबाज़ी रणनीति रोज़ एक जगह रखते हैं। असल बात यह है कि नियम रटने की चीज़ नहीं, बार-बार देखने से पक्के होने वाली आदत हैं। तीस दिन बाद अगर आप खुद किसी दोस्त को वाइड और नो-बॉल का फ़र्क़ समझा पाएँ, तो समझिए नियमों पर आपकी पकड़ बन चुकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q: क्रिकेट के नियम क्या हैं और इन्हें कौन बनाता है?
A: क्रिकेट के नियम 42 कानूनों की एक संहिता हैं, जिसे लंदन का मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) बनाए रखता है। इसमें खिलाड़ियों की संख्या, ओवर, रन, आउट और अंपायर की भूमिका तय है। ICC इसके ऊपर अंतरराष्ट्रीय मैचों की अलग खेलने की शर्तें लागू करता है, इसलिए टेस्ट, वनडे और टी20 के नियमों में फ़र्क़ मिलता है।
Q: एक ओवर में कितनी गेंदें होती हैं और वाइड-नो-बॉल का क्या होता है?
A: एक ओवर में 6 वैध गेंदें होती हैं। वाइड या नो-बॉल गिनी नहीं जाती, इसलिए गेंदबाज़ को उसे दोबारा फेंकना पड़ता है और बल्लेबाज़ी करने वाली टीम को कम से कम एक अतिरिक्त रन मिलता है। सीमित ओवरों में नो-बॉल के बाद अगली गेंद फ्री हिट होती है।
Q: वनडे, टी20 और टेस्ट में क्या अंतर है?
A: मुख्य अंतर ओवरों की संख्या का है: टी20 में 20, वनडे में 50 और टेस्ट में पाँच दिन तक असीमित ओवर। टी20 में गेंदबाज़ 4 ओवर और वनडे में 10 ओवर डाल सकता है, जबकि टेस्ट में कोई सीमा नहीं। फ्री हिट और पॉवरप्ले भी सिर्फ़ सीमित ओवरों में होते हैं।
Q: डीआरएस क्या है और कब काम नहीं करता?
A: डीआरएस (डिसीज़न रिव्यू सिस्टम) टीम को अंपायर के फ़ैसले की समीक्षा माँगने देता है। इसमें गेंद-ट्रैकिंग और अल्ट्राएज जैसी तकनीक इस्तेमाल होती है। हर पारी में सीमित रिव्यू मिलते हैं और "अंपायर्स कॉल" पर मूल फ़ैसला कायम रहता है। गली-क्रिकेट में अक्सर डीआरएस नहीं होता, इसलिए अंपायर का फ़ैसला अंतिम माना जाता है।
Q: स्थानीय टूर्नामेंट में नियम विवाद हो जाए तो क्या करें?
A: विवाद होने पर आयोजक का लिखित नियम-पत्र ही अंतिम आधार होता है। अगर नियम-पत्र में उस स्थिति का ज़िक्र न हो, तो अंपायर का फ़ैसला मान्य रखें और बाद में आयोजक से स्पष्टीकरण माँगें। अगली बार मैच से पहले कप्तानों से लिखित सहमति ले लें, ताकि बहस दोबारा न हो।
Q: क्रिकेट के नियम सीखने में कितना खर्च आता है?
A: नियम सीखना लगभग मुफ़्त है। MCC की संहिता, ICC की वेबसाइट और विकिपीडिया पर सामग्री निःशुल्क उपलब्ध है, और हिंदी में भी कई स्रोत मौजूद हैं। असली निवेश समय का है: रोज़ 10 मिनट और हर हफ़्ते एक मैच, यानी लगभग एक महीने में आप बुनियादी नियमों पर पकड़ बना लेते हैं।