2026 क्रिकेट बैट ग्रिप: 7 खास बातें
क्रिकेट बैट की ग्रिप बदलने का सबसे सुरक्षित तरीका पुरानी ग्रिप हटाकर हैंडल साफ करना, नई रबर ग्रिप को शंकु उपकरण से समान दबाव में चढ़ाना और अंत में टेप से लॉक करना है। पिच रिपोर्ट के अनुसार, यह तरीका भ...
2026 क्रिकेट बैट ग्रिप: 7 खास बातें
क्रिकेट बैट की ग्रिप बदलने का सबसे सुरक्षित तरीका पुरानी ग्रिप हटाकर हैंडल साफ करना, नई रबर ग्रिप को शंकु उपकरण से समान दबाव में चढ़ाना और अंत में टेप से लॉक करना है। पिच रिपोर्ट के अनुसार, यह तरीका भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे क्रिकेट बाजारों में घरेलू तथा क्लब खिलाड़ियों के लिए उपयोगी है। सामान्य ग्रिप की लंबाई 25 से 30 सेंटीमीटर, मोटाई लगभग 1.5 से 2.5 मिलीमीटर और कीमत 100 से 500 रुपये के बीच मिलती है। टेनिस ओवरग्रिप और क्रिकेट बैट ग्रिप एक जैसे नहीं होते; टेनिस पट्टी पतली होती है और लंबे समय तक पसीना रोकने में कमजोर पड़ सकती है। नई ग्रिप लगाते समय हैंडल का निचला सिरा खुला रखें, ऊपर की ओर लगभग 45 डिग्री कोण बनाए रखें और हर चक्कर में 3 से 5 मिलीमीटर ओवरलैप रखें। सबसे व्यावहारिक सलाह यह है कि फटी, घूमती या चिकनी ग्रिप को तुरंत बदलें, चाहे बल्ला अभी भी खेलने योग्य क्यों न दिखता हो।

“सही पकड़ शॉट की दिशा और नियंत्रण दोनों को प्रभावित करती है।” यह बात साधारण लगती है, लेकिन बल्ले की ग्रिप पर बचत करने की गलती अक्सर दस्ताने, कलाई और शॉट चयन पर अतिरिक्त दबाव डालती है। सुनिए — यही वह हिस्सा है जो मायने रखता है: सबसे महंगी ग्रिप हमेशा सबसे अच्छी नहीं होती, और सबसे सस्ती ग्रिप भी हमेशा खराब नहीं होती। हैंडल का व्यास, पसीने की मात्रा, बल्लेबाजी की शैली और बैट का वजन मिलकर सही चुनाव तय करते हैं। मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के नियम बल्ले की संरचना और अनुमत उपकरणों के बारे में आधारभूत संदर्भ देते हैं, हालांकि ग्रिप बदलना नियमों से अधिक सुरक्षा और नियंत्रण का विषय है। पिच रिपोर्ट पर बल्लेबाजी तकनीक और उपकरण संबंधी सामग्री पढ़ते समय कीमत के साथ उपयोग अवधि भी देखें। एक 150 रुपये की ग्रिप यदि 30 अभ्यास सत्र चलती है, तो वह 400 रुपये की ऐसी ग्रिप से बेहतर मूल्य दे सकती है जो केवल 15 सत्र टिके।
इस विषय पर आगे की तैयारी के लिए शुरुआती बल्लेबाजी उपकरण मार्गदर्शिका देखना उपयोगी रहेगा।
यदि आप बल्ले की पकड़ को अभी व्यवस्थित करना चाहते हैं, तो पहले सही ग्रिप आकार और उपकरण चुनें।
त्वरित तुलना: कौन-सी ग्रिप चुनें?
| विकल्प | पकड़ | पसीना नियंत्रण | टिकाऊपन | सामान्य कीमत |
|---|---|---|---|---|
| मानक रबर ग्रिप | संतुलित | अच्छा | 1 से 3 महीने | 100–250 रुपये |
| मोटी रबर ग्रिप | नरम और स्थिर | बहुत अच्छा | 2 से 4 महीने | 180–400 रुपये |
| बनावट वाली ग्रिप | अधिक घर्षण | अच्छा | 1 से 3 महीने | 200–500 रुपये |
| टेनिस ओवरग्रिप | हल्की | मध्यम | 1 से 4 सप्ताह | 80–200 रुपये |
| पेशेवर प्रतिस्थापन ग्रिप | खिलाड़ी के अनुसार | बहुत अच्छा | 2 से 6 महीने | 300–800 रुपये |
यह तुलना केवल दुकान की कीमत पर आधारित नहीं होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, एसजी, एसएस और कूकाबुरा जैसे ब्रांड अलग-अलग मोटाई, सतह और संपीड़न देते हैं; एक ही नाम की ग्रिप भी रंग और मॉडल के अनुसार अलग महसूस हो सकती है। भारत में स्थानीय खेल दुकानों पर 100 से 250 रुपये की मानक ग्रिप सामान्य है, जबकि मुंबई, दिल्ली और लाहौर जैसे बड़े क्रिकेट बाजारों में पेशेवर विकल्प अधिक मिलते हैं। ध्यान रखें कि निर्माता की पैकिंग पर लिखी कीमत उपयोग अवधि की गारंटी नहीं होती, क्योंकि गर्मी, पसीना, धूल और अभ्यास की आवृत्ति परिणाम बदलते हैं। यदि हैंडल पहले से बहुत पतला है, तो मोटी ग्रिप नियंत्रण सुधार सकती है; लेकिन बहुत मोटी परत कलाई की गति को सीमित कर सकती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के उपकरण संबंधी सामान्य सुरक्षा दृष्टिकोण से भी खिलाड़ी को आराम, नियंत्रण और सुरक्षित उपयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए।

पहला दौर: क्या पुरानी ग्रिप सही तरीके से हटानी चाहिए?
पुरानी ग्रिप हटाने के लिए निचले सिरे की टेप खोलें, ग्रिप को धीरे-धीरे नीचे की ओर खींचें और फंसी हुई रबर पर कुंद किनारे वाला उपकरण लगाएं। तेज चाकू सीधे हैंडल पर चलाने से लकड़ी या हैंडल की बाहरी परत कट सकती है, इसलिए धैर्य सबसे सस्ता सुरक्षा उपाय है। यदि ग्रिप चिपक गई हो, तो उसे 30 से 60 सेकंड तक हाथों से गर्म करके नरम करें; गर्म पानी, खुली लौ या तेज हीट गन का उपयोग न करें। इस चरण का उद्देश्य पुरानी सामग्री निकालना ही नहीं, बल्कि यह जांचना भी है कि हैंडल में दरार, ढीलापन, नमी या असामान्य उभार तो नहीं है।
पुरानी ग्रिप की स्थिति देखकर बल्ले की वास्तविक जरूरत समझी जा सकती है। यदि केवल सतह चिकनी हुई है, तो नई ग्रिप पर्याप्त होगी; लेकिन यदि हैंडल मुड़ा हुआ है, लकड़ी अलग हो रही है या ऊपर का रबर शंकु ढीला है, तो ग्रिप बदलना समस्या छिपाएगा, हल नहीं करेगा। बल्ले को सूखे कपड़े से पोंछें और कम से कम 10 मिनट कमरे के तापमान पर रखें, खासकर यदि वह पसीने या बारिश के संपर्क में रहा हो। सुनिए — यही वह हिस्सा है जो मायने रखता है: गीले हैंडल पर नई ग्रिप चढ़ाने से अंदर नमी बंद हो सकती है और फिसलन बढ़ सकती है। भारतीय मानक ब्यूरो के गुणवत्ता सिद्धांतों की तरह यहां भी सतह की सफाई और सामग्री की स्थिति की जांच अंतिम सजावट से अधिक महत्वपूर्ण है।
पुरानी ग्रिप हटाने के बाद ये तीन जांच करें:
- हैंडल को दोनों हाथों से हल्का दबाकर ढीलापन महसूस करें।
- निचले सिरे और ऊपरी शंकु पर दरार या टूटे किनारे देखें।
- बल्ले को सूंघकर नमी, फफूंदी या गोंद की असामान्य गंध पहचानें।
यदि इनमें से कोई संकेत मिले, तो पहले क्रिकेट बैट मरम्मत विशेषज्ञ से राय लें। बल्ले की दरार पहचानने और मरम्मत की मार्गदर्शिका इस जांच में मदद कर सकती है।
दूसरा दौर: नई ग्रिप कैसे चढ़ाएं और सही ओवरलैप कितना रखें?
नई ग्रिप चढ़ाने के लिए उसका एक सिरा ग्रिप कोन पर लगाएं, कोन को हैंडल के निचले हिस्से से ऊपर धकेलें और फिर सामग्री को धीरे-धीरे फैलाते हुए हैंडल पर उतारें। सही ओवरलैप सामान्यतः 3 से 5 मिलीमीटर होता है; इससे पकड़ के बीच खाली पट्टी नहीं बनती और उंगलियों को अचानक कठोर किनारा महसूस नहीं होता। ग्रिप को बहुत खींचने पर वह पतली और कमजोर हो सकती है, जबकि ढीली चढ़ाने पर 10 से 20 गेंदों के बाद घूमना शुरू कर सकती है। इसलिए हर चक्कर के बाद अंगूठे से हल्का दबाव देकर रेखा सीधी रखें और ऊपर तक समान तनाव बनाए रखें।
व्यावहारिक रूप से ग्रिप के दो तरीके हैं: कोन विधि और हाथ से रोल विधि। कोन विधि तेज, साफ और शुरुआती खिलाड़ियों के लिए अधिक भरोसेमंद है; हाथ से रोल विधि में अतिरिक्त उपकरण नहीं चाहिए, लेकिन गलत कोण से झुर्रियां बन सकती हैं। यदि बल्लेबाज निचले हाथ से अधिक नियंत्रण लेता है, तो नीचे की ओर थोड़ी मोटी ग्रिप उपयोगी हो सकती है; ऊपरी हाथ से खेलने वाले खिलाड़ी को समान मोटाई अधिक स्वाभाविक लग सकती है। यहां लोकप्रिय सलाह “ग्रिप जितनी मोटी, नियंत्रण उतना बेहतर” अधूरी है, क्योंकि 2 से 3 मिलीमीटर की अतिरिक्त मोटाई छोटे हाथों वाले खिलाड़ी की कलाई को बंद कर सकती है। मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के बल्ले संबंधी तकनीकी संदर्भ को ध्यान में रखते हुए, ग्रिप को बल्ले की मूल संतुलन भावना नहीं बिगाड़नी चाहिए।
नई ग्रिप चढ़ाते समय यह क्रम रखें:
- निचले सिरे पर 2 से 3 सेंटीमीटर सामग्री छोड़ें।
- प्रत्येक चक्कर में 3 से 5 मिलीमीटर ओवरलैप रखें।
- हथेली के क्षेत्र में झुर्री न बनने दें।
- ऊपर पहुंचने पर अतिरिक्त रबर काटने के बजाय पहले स्थिति जांचें।
- अंतिम किनारे पर 2 से 3 परत कपड़ा या पकड़ टेप लगाएं।
इस चरण में पांच मिनट की जल्दबाजी अक्सर पूरे 200 से 500 रुपये के खर्च को बेकार कर देती है। ग्रिप सीधी हो, लेकिन इतनी कसी न हो कि रबर में सफेद खिंचाव की रेखाएं दिखने लगें।
अगले चरण के दृश्य उदाहरण और उपकरण चयन के लिए क्रिकेट बैट रखरखाव के उन्नत तरीके उपयोगी है।
अब सही पकड़ बनाने के बाद अंतिम सीलिंग और खेल से पहले की जांच पर ध्यान दें।

तीसरा दौर: टेप, मोटाई और अंतिम पकड़ कैसे जांचें?
ग्रिप लगाने के बाद निचले सिरे और ऊपरी जोड़ को कपड़ा टेप या निर्माता द्वारा दिए गए फिनिशिंग टेप से सुरक्षित करें। बल्ले को कम से कम 15 से 20 मिनट स्थिर रखें, फिर दोनों हाथों से 30 सेकंड पकड़कर देखें कि कहीं रबर घूम तो नहीं रहा। इसके बाद हल्के शैडो शॉट, डिफेंस और ड्राइव की मुद्रा में पकड़ जांचें; वास्तविक गेंद से तुरंत अभ्यास करना जरूरी नहीं है। यदि हथेली पर एक ही स्थान पर दबाव बन रहा है, तो ग्रिप की मोटाई या ओवरलैप असमान हो सकता है। खेलने से पहले ग्रिप सूखी, साफ और बिना खुले किनारे की होनी चाहिए।
मोटाई का चुनाव उंगलियों के बंद होने और बल्ले के संतुलन से करें, केवल रंग या ब्रांड से नहीं। छोटे हाथों वाले किशोर खिलाड़ी के लिए 1.5 से 2 मिलीमीटर की मानक ग्रिप अक्सर पर्याप्त होती है, जबकि बड़े हाथ या भारी बल्ले वाले खिलाड़ी को 2 से 2.5 मिलीमीटर आराम दे सकती है। बहुत मोटी ग्रिप झटके को कुछ हद तक कम कर सकती है, लेकिन इससे बल्ले का हैंडल बड़ा महसूस होता है और तेज सिंगल के समय कलाई की दिशा बदलना कठिन हो सकता है। दूसरी ओर, अत्यधिक पतली ग्रिप में उंगलियों का दबाव बढ़ता है, खासकर 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास गर्म मैदानों में जब पसीना नियंत्रण घटाता है। इसलिए एक ही बल्लेबाज के लिए अभ्यास और मैच ग्रिप अलग रखना कभी-कभी बेहतर मूल्य देता है।
अंतिम जांच की यह सूची अपनाएं:
- ग्रिप को ऊपर और नीचे की दिशा में खींचकर फिसलन जांचें।
- बल्ले को 10 बार हल्के कोण पर घुमाकर घूमती रबर पहचानें।
- 20 सेकंड तक सामान्य पकड़ बनाकर हथेली के दबाव बिंदु देखें।
- निचले सिरे का टेप खुला, मुड़ा या चुभता हुआ न हो।
- बल्ले का संतुलन नई ग्रिप के बाद असामान्य रूप से भारी न लगे।
एक महत्वपूर्ण किन्तु कम चर्चित बात यह है कि नई ग्रिप को तुरंत तेल, पानी या चिपकने वाले स्प्रे से उपचारित करना जरूरी नहीं है। कुछ स्प्रे रबर की सतह को अस्थायी रूप से चिपचिपा बनाते हैं, पर धूल जमा कर फिसलन जल्दी बढ़ा सकते हैं। बेहतर विकल्प सूखा कपड़ा और नियमित निरीक्षण है।

मैच तैयारी से जुड़े अन्य व्यावहारिक संकेतों के लिए बल्लेबाजी से पहले उपकरण जांच सूची पढ़ें।
यदि ग्रिप घूमती नहीं, हथेली पर दबाव समान है और हैंडल सूखा है, तो बल्ला अभ्यास के लिए तैयार है।
अंतिम स्कोर और किसे क्या चुनना चाहिए?
सबसे अच्छा विकल्प वह ग्रिप है जो हाथ के आकार, पसीने, बल्ले के वजन और अभ्यास की अवधि के साथ मेल खाए। घरेलू खिलाड़ी के लिए 100 से 250 रुपये की मानक रबर ग्रिप पर्याप्त हो सकती है, जबकि रोजाना नेट अभ्यास करने वाले खिलाड़ी को 250 से 500 रुपये की मोटी या बनावट वाली ग्रिप का बेहतर मूल्य मिल सकता है। टेनिस ओवरग्रिप आपातकालीन समाधान है, स्थायी क्रिकेट बैट ग्रिप नहीं; गर्म मौसम, धूल और पसीने में उसका जीवन 1 से 4 सप्ताह तक सीमित हो सकता है। यह निष्कर्ष लोकप्रिय “पेशेवर ब्रांड ही जरूरी है” वाली धारणा से अलग है, क्योंकि सही फिट अक्सर लोगो से अधिक असर डालता है।
| खिलाड़ी की स्थिति | प्राथमिक चुनाव | कारण |
|---|---|---|
| शुरुआती खिलाड़ी | मानक रबर ग्रिप | कम कीमत और आसान नियंत्रण |
| अधिक पसीना | बनावट वाली मोटी ग्रिप | घर्षण और स्थिरता |
| छोटे हाथ | पतली ग्रिप | कलाई की स्वतंत्र गति |
| भारी बल्ला | मध्यम मोटाई | झटका और पकड़ का संतुलन |
| अस्थायी मरम्मत | टेनिस ओवरग्रिप | तुरंत उपलब्ध, कम लागत |
| प्रतियोगी खिलाड़ी | पेशेवर फिटिंग | व्यक्तिगत मोटाई और संतुलन |
रखरखाव का सही चक्र भी लागत घटाता है। हर अभ्यास सत्र के बाद ग्रिप को सूखे कपड़े से पोंछें, बल्ले को बंद गीले बैग में न रखें और हर 7 से 14 दिन में किनारों की जांच करें। यदि सतह चिकनी हो गई है, रबर में कट है या ग्रिप हाथ में घूमती है, तो अगली प्रतियोगिता तक इंतजार न करें। पिच रिपोर्ट की बल्लेबाजी रणनीति सामग्री की तरह उपकरण निर्णय में भी तथ्य देखें: ग्रिप का वजन, मोटाई, जलवायु और उपयोग अवधि लिखकर तुलना करें। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल और मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब नियमों तथा खेल मानकों के लिए उपयोगी संदर्भ हैं, पर व्यक्तिगत आराम का निरीक्षण खिलाड़ी को स्वयं करना होगा।
निष्कर्ष सीधा है: पुरानी ग्रिप सावधानी से हटाएं, हैंडल सुखाएं, 3 से 5 मिलीमीटर ओवरलैप रखें, 15 से 20 मिनट बाद पकड़ जांचें और जरूरत से ज्यादा मोटाई से बचें। थोड़ी मेहनत और 100 से 500 रुपये का समझदार खर्च बल्ले की सुरक्षा, शॉट नियंत्रण और अभ्यास की निरंतरता सुधार सकता है। महंगी ग्रिप खरीदना समाधान नहीं; सही आकार और सही स्थापना ही असली बढ़त है। यदि किसी हैंडल में दरार, ढीलापन या नमी दिखे, तो नई ग्रिप लगाने से पहले विशेषज्ञ मरम्मत कराएं।
अपनी अगली बल्लेबाजी तैयारी को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए यह अंतिम सुझाव सुरक्षित रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्रिकेट बैट की ग्रिप क्या होती है?
उत्तर: क्रिकेट बैट की ग्रिप हैंडल पर चढ़ी रबर या सिंथेटिक परत है, जो हाथ को फिसलने से रोकती है और झटके को नियंत्रित करने में मदद करती है। सामान्य ग्रिप 25 से 30 सेंटीमीटर लंबी और लगभग 1.5 से 2.5 मिलीमीटर मोटी हो सकती है। इसकी बनावट, मोटाई और घर्षण बल्ले के नियंत्रण को प्रभावित करते हैं। एसजी, एसएस और कूकाबुरा जैसे ब्रांड अलग-अलग सतह और संपीड़न वाले विकल्प बेचते हैं।
प्रश्न: क्रिकेट बैट की ग्रिप कैसे बदलें?
उत्तर: पहले निचले सिरे का टेप खोलकर पुरानी ग्रिप हटाएं, फिर हैंडल साफ और सूखा करें तथा नई ग्रिप को कोन से ऊपर चढ़ाएं। प्रत्येक चक्कर में 3 से 5 मिलीमीटर ओवरलैप रखें और अंत में टेप से दोनों किनारे सुरक्षित करें। नई ग्रिप को 15 से 20 मिनट स्थिर रखने के बाद हाथ से खींचकर फिसलन जांचें। तेज चाकू, खुली लौ और गीली सतह से बचना जरूरी है।
प्रश्न: क्रिकेट बैट की ग्रिप और टेनिस ओवरग्रिप में क्या अंतर है?
उत्तर: क्रिकेट बैट ग्रिप मोटी और टिकाऊ होती है, जबकि टेनिस ओवरग्रिप पतली, हल्की और अस्थायी उपयोग के लिए बनाई जाती है। मानक क्रिकेट ग्रिप 1 से 3 महीने चल सकती है, जबकि टेनिस ओवरग्रिप पसीने और धूल में 1 से 4 सप्ताह में बदलनी पड़ सकती है। आपातकाल में ओवरग्रिप उपयोगी है, लेकिन नियमित क्रिकेट अभ्यास के लिए वास्तविक बैट ग्रिप अधिक सुरक्षित और किफायती रहती है।
प्रश्न: नई ग्रिप लगाने के बाद भी बल्ला क्यों घूमता है?
उत्तर: बल्ला आमतौर पर ढीले ओवरलैप, असमान तनाव, गीले हैंडल या अपर्याप्त अंतिम टेप के कारण घूमता है। ग्रिप को 3 से 5 मिलीमीटर ओवरलैप में दोबारा चढ़ाएं और निचले तथा ऊपरी किनारे पर टेप की 2 से 3 परत लगाएं। यदि हैंडल स्वयं ढीला या दरारयुक्त है, तो केवल ग्रिप बदलने से समस्या दूर नहीं होगी। ऐसी स्थिति में खेल मरम्मत विशेषज्ञ की जांच आवश्यक है।
प्रश्न: क्रिकेट बैट की ग्रिप बदलने में कितना खर्च आता है?
उत्तर: भारत में सामान्य ग्रिप की कीमत 100 से 250 रुपये और मोटी या पेशेवर ग्रिप की कीमत लगभग 300 से 800 रुपये हो सकती है। स्थानीय दुकान पर लगाने का श्रम शुल्क 50 से 200 रुपये अतिरिक्त हो सकता है, जबकि स्वयं लगाने पर यह खर्च बच जाता है। कीमत की तुलना करते समय उपयोग अवधि, पसीना नियंत्रण और हैंडल के साथ फिट जरूर देखें। 150 रुपये की टिकाऊ ग्रिप कई बार 400 रुपये की जल्दी घिसने वाली ग्रिप से बेहतर मूल्य देती है।
प्रश्न: ग्रिप कितने समय बाद बदलनी चाहिए?
उत्तर: ग्रिप को समय देखकर नहीं, बल्कि उसकी पकड़ और स्थिति देखकर बदलना चाहिए; सामान्य उपयोग में 1 से 3 महीने एक व्यावहारिक सीमा है। रोजाना अभ्यास, गर्म मौसम और अधिक पसीने में यह अवधि घटकर 2 से 6 सप्ताह हो सकती है। चिकनी सतह, कटे किनारे, दुर्गंध, घूमती रबर या हथेली पर बढ़ता दबाव बदलाव के स्पष्ट संकेत हैं। प्रतियोगिता से पहले कम से कम एक अभ्यास सत्र नई ग्रिप के साथ करना बेहतर है।
प्रश्न: क्या मोटी ग्रिप हर बल्लेबाज के लिए बेहतर होती है?
उत्तर: मोटी ग्रिप हर बल्लेबाज के लिए बेहतर नहीं होती; इसका लाभ हाथ के आकार, बल्ले के वजन और कलाई की शैली पर निर्भर करता है। बड़े हाथ या भारी बल्ले वाले खिलाड़ी को 2 से 2.5 मिलीमीटर मोटाई आराम दे सकती है, जबकि छोटे हाथों वाले खिलाड़ी को 1.5 से 2 मिलीमीटर अधिक नियंत्रण मिल सकता है। बहुत मोटी ग्रिप कलाई की दिशा बदलने में बाधा डाल सकती है। इसलिए खरीदने से पहले 20 से 30 सेकंड की सामान्य पकड़ और कुछ शैडो शॉट से फिट जांचें।